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विश्व पुस्तक मेला की जापानी गुड़िया

Posted by chimeki on March 8, 2012



दोस्तों, मैं विदेशी प्रकाशकों का हॉल नंबर 7 घूम आया. प्रकाशकों से मुलाकात की, बात की और थोड़ी आप लोगों की (इस देश की जनता की) बुराई भी कर डाली. मैनें वही कहा जो आप लोग हमेशा आपस मेंकहते रहते हो. जैसे, गंभीर पुस्तकें कोई पढ़ना नहीं चाहता, लोग किताबों पर पैसा खर्च नहीं करते, भारतीय लोग में एक प्रकार का जेनोफोबिया है इसलिए हॉल में प्रवेश करते से घबराते है, आदि .

देखिए, यह सारी बात मैने अकेले नहीं की बल्कि एक बतूने अंकल किसी प्रकाशक से कह रहे थे और मैने ज्ञान बघारने के लिए अंतिम वाक्य जोड़ दिया. इसके बावजूद मैने वहां से सिर्फ एक ही किताब खरीदी. तो हुआ न मैं आप लोगों में से एक . 20वें नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस बार 30 विदेशी प्रकाशक भाग ले रहे है जिनमें पाकिस्तान के सबसे अधिक प्रकाशक है. हॉल नंबर 7 में थीम पवेलियन से सटे इस हॉल में बहुत कम लोग ही दिख रहे हैं.

हॉल नंबर सात का प्रमुख आकर्षण है गणतंत्र ईरान का स्टॉल. यहां आप ईरान के आधुनिक संस्थापक आयातोल्लाह खमेनी के बारे में जानकारी देने वाली बहुत सी किताबों को देख सकते है. यहीं मुझे पता चला कि ईरानी क्रांति के बाद ईरान ने प्रकाशन के क्षेत्र में बहुत उन्नति की है. आज ईरान में 11 हजार से अधिक लायसंस प्राप्त प्रकाशक है जो हर साल 65 हजार से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर रहे हैं. यह संख्या क्रांति पूर्व की कुल संख्या से 30 गुना अधिक है.

यदि आप काएदे आजम जिन्ना के 17 खंडों वाली संकलित रचनाओं को पढ़ना चाहते है तो आप इसी हॉल में स्टॉल लगाए एक पाकिस्तानी प्रकाशक से इसे खरीद सकते हैं. पाकिस्तान के एक स्टॉल में मुझे माओ त्से तुंग से संबंधित किताब भी दिखाई दी और जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में बताती किताब भी. हैरानी यह जानकर हुई कि लेखक ने तीनों की प्रशंसा की है. यह देख कर मुझे याद आया कि हमारे यहां तो जिन्ना की तारीफ करने वाले को पार्टी ही जोड़नी पड़ती है.
लेकिन जिस स्टॉल पर मुझे सबसे अधिक आनंद आया वह था जापान फाउंडेशन का हॉल . इस स्टॉल में मुझे मिली एक गुडि़या जापान की. उसका नाम था जूको यामानोई. इस खूबसूरत लड़की ने मुझे बताया कि उनके फाउंडेशन का मकसद जापानी साहित्य के बारे में भारतीय पाठकों को जानकारी देना है और भारत के बाजार में इसे प्रवेश दिलाना है. फिलहाल यह फाउंडेशन बच्चों के लिए किताब (मुख्यतः कॉमिक ) लेकर बाजार में उतर रहा है.

बातों बातों में फिल्मों पर भी चर्चा हुई. मैंने बताया कि भारत में कुरसोवा के बहुत प्रशंसक है तो उसे बहुत अच्छा लगा. इसके बाद उसने मुझे किसी और फिल्म के बारे में पूछा. इत्तीफाक से मैंने उसे हाल में ही देखा था तो मेरी प्रतिष्ठा और बढ़ गई. इसके बाद तो क्या कहने. उसने मुझे ढूंढ-ढूंढ कर मुफ्त में बांटने वाली सामग्री उपहार में दे दी. मेरा झोला ही भर गया.

हॉल में तुर्की, जर्मनी, इजरायल, सउदी अरब, नेपाल तथा अन्य देशों के प्रकाशक भी हैं . जहां जर्मनी के स्टॉल में होम्योपैथी संबंधी जानकारी मिल रही है वहीं इजरायल का लक्ष्य भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करना है. नेपाल के प्रकाशक का मकसद विशुद्ध रूप से पुस्तकें बेचना है. हेरिटेज पब्लिशर नेपाल के बाबूराम गौतम ने बताया कि 2007 के बाद नेपाल के प्रकाशन उद्योग ने गति पकड़ी है और जैसे जैसे राजनीतिक अस्थिरता का दौर खत्म हो रहा है वैसे-वैसे इस उद्योग के विकास करने के अवसर बन रहे है.

दोस्तों, इस हॉल में प्रवेश करने के बहुत से और भी फायदे है. यह ऐसा हॉल है जहां आप किलो भर सामग्री मुफ्त हासिल कर सकते है. हर स्टॉल के पास कई-कई पुस्तिकाएं हैं जो वे लोगों को उपहार स्वरूप देने के लिए लाए हैं. वल्र्ड बैंक के स्टॉल में मुझे कई तरह कि आर्थिक और सामाजिक रिपोर्ट मिली और डायचे वेले के स्टॉल से एक पैन, एक नोट पैड और एक चावी का छल्ला. एक जरूरी सूचना इस स्टॉल में एक क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई है. इसमें भाग लेकर और एक साधारण से सवाल का मामूली सा जवाब देकर आप जीत सकते है विदेशी जैकिट, थरमस, फोन एवं अन्य उपहार. और मैं किस काम का यदि आप लोगों को उस सवाल का उत्तर न बता सकूं. तो लिख लीजिए. उस प्रश्न का उत्तर है, ‘विज्ञान’. देखिए डायचे वेले की मिस भाटिया को मत बताइएगा कि यह जवाब मैने आप को बताया है.

साथियों आज के लिए बस इतना ही. कल फिर मेले की खबर के साथ आप से मुलाकात का वादा करता हूं.

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