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सिनेमा पर केंद्रित 20वां विश्व पुस्तक मेला

Posted by chimeki on March 8, 2012



नेशनल बुक ट्रस्ट के आयोजन में 20वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान में 25 फरवरी 2012 से 4 मार्च 2012 जारी है. इस बार पुस्तक मेला भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष विषय पर केन्द्रित है. मेले में इस वर्ष 1300 प्रकाशक भाग ले रहे है जिनमें 30 विदेशी प्रकाशक है. विदेशों से आने वाले में सब से अधिक प्रकाशक पाकिस्तान से है.

आयोजकों के अनुसार 80 बड़े प्रकाशकों द्वारा अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाओं में थीम विषय (सिनेमा) पर प्रकाशित 300 पुस्तकों को प्रदर्शित किया जाएगा. इस आयोजन के लिए हॉल नंबर 7 को थीम पावेलियन बनाया गया है जहां नियमित रूप से फिल्मों का मंचन भी किया जा रहा है. साथ ही भारतीय फिल्मों पर विमर्श में फारूख शेख, जुवैर रिजवी तथा अन्य जाने माने लोग भाग लेंगे.

हॉल नंबर 7 में कल साहब, बीबी और गुलाम का मंचन किया गया. आज 1981 की फिल्म उमराव जान का प्रदर्शन  होगा.

हर बार की तरह इस बार भी पुस्तक मेले में लोगों की अच्छी खासी भीड़ है. बातचीत के दौरान एक प्रकाशक ने बताया कि दिल्ली पुस्तक मेला भारत के आधुनिक त्यौहारों में एक है. यह पुस्तकों के दिवानों का कुम्भ है. 45 हजार वर्ग मीटर में फैले इस मेले में लगे 2500 से अधिक स्टॉल को देख कर उनकी बात पर यकीन हो जाता है.

इतने सारे प्रकाशकों के होने के बावजूद सब से अधिक भीड़ एक नंबर हॉल के नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल में ही देखने को मिली. आप की दिलचस्पी चाहे जिस भी विषय में हो इस स्टॉल में आप को एक या दो पसंद की किताब मिल ही जाएंगी. ग्राम्शी के ऑर्गैनिक बुद्धिजीवियों यानी वे पाठक जो सब कुछ इसी जन्म में पढ़ लेना चाहते है उनके लिए तो यह स्टॉल कुबेर का खजाना है.

यकीन मानिए मैने इतनी किताबे खरीदी की मेरे सारे पैसे इसी स्टॉल में खत्म हो गए. (उन लोगो ने मेरी किसी भी चीज को गिरवी रखने से मना कर दिया.)  इतिहास, खेल, संगीत, नाट्य, देश-विदेश, स्वास्थ्य, बच्चों की रूचि वालीं किताबें आदि अनेक विषयों पर रोचक किताबें इस स्टॉल पर उपलब्ध है. और सबसे जरूरी बात ये किताबें सस्ती है.

पाठकों के लिए एक जरूरी सूचना. यदि आप इस खबर को पढ़ कर हॉल नंबर एक में दाखिल होने की सोच रहे है तो यह अच्छा होगा कि आप इसी हॉल में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्टॉल पर भी हो आइए. इस स्टॉल में बहुत ही जरूरी पुस्तक लगभग मुफ्त मिल रही है (लगभग शब्द पर ध्यान दीजिए). 2003 तक प्रकाशित मंत्रालय की तमाम पुस्तकों पर 50 फीसदी की छूट है.

ये किताबें औसतत 30 से 50 रुपए मूल्य की है. यानि आप को 15 से 25 रुपए में मोटी-माटी पुस्तकें मिल जाएंगी. ये पुस्तके संदर्भ सामग्री के लिए अच्छी है. मैनें यहां से खरीदी शहीदों के खत, भारत का जन इतिहास, डोक्यूमेंट्री फिल्म, श्री अरबिंदो की जीवनी, इंदिरा गांधी की जीवनी, भारत और खेल जगत, मौलाना आजाद के संकलित भाषण, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश आदी. मैनें मोटी-माटी 18 किताबें 499 रुपए और 80 नए पैसों में खरीदी.

खरिदारी के बाद में हॉल नंबर 7 (थीम हॉल) चला गया जहां 1962 की फिल्म साहब, बीबी और गुलाम दिखाई जा रही थी. इतनी पुरानी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना बहुत ही मनोरंजक था.

आज फिर मैं पुस्तक मेला जा रहा हूं. आज की मेरी योजना मुख्य तौर पर हिन्दी भाषा के हॉल (हॉल नंबर 11) में तफरी करने की है. देखते है वहां क्या मिलता है?

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