छिमेकी

know your neighbour

यह बीबीसी हिंदी है

Posted by chimeki on May 16, 2012



वर्ष 2012 में भारत की संसद ने 60 साल पूरे किए और बीबीसी विश्व सेवा भी अपनी 80वीं वर्षगांठ धूमधाम से मना रही है. मेरे एक मित्र जो बीबीसी हिंदी सेवा के साथ लंबे समय तक जुड़े हुए थे, बीबीसी की इस उपलब्धि पर उन लोगों से अधिक प्रसन्न हैं जो आज भी बीबीसी से जुड़े हुए हैं. बीबीसी से उनका जुड़ाव ऐसा है कि उनके लिए इंटरनेट का मतलब ही बीबीसी है.

उनकी बीबीजी (वे अपनी पत्नी को इसी अंदाज से बुलाते हैं) बताती हैं कि दफ्तर से घर लौटते ही सीधे बीबीसी का ‘पहला पन्ना’ खोल कर बहुत देर तक उसे घूरते रहते हैं. फिर एक ऐसी खबर खोज लेते हैं जो और किसी वेबसाइट में नहीं होती. पूरे गर्व के साथ उसे चटकाते  हुए कहते हैं, ‘ये बीबीसी है’.

हालांकि वे दूसरी वेबसाइट और ब्लॉगों के चक्कर भी कभी-कभी काट लेते हैं,  लेकिन सिर्फ इसलिए कि देख सकें कि ‘उनमें जहालत की कौन सी नई उंचाइयां-निचाईयां छुई जा रही हैं.’ और एक मैं हूं कि जिसे बीबीसी ने कभी इतना उत्साहित नहीं किया कि बिना उनके आग्रह के वेबसाइट खोलूं. हां जब नरेलाजी बीबीसी की किसी खबर को अपनी फेसबुक वॉल पर चस्पा करते है तो उसे जरूर देख लेता हूं. बस इतना ही.

अपने उस मित्र की यात्रा से अलग, जो बीबीसी से फेसबुक की ओर बढ़ती है, मैं फेसबुक से बीबीसी की ओर जाता हूं. कभी-कभी मेरी इस लापरवाही पर मेरे मित्र गुस्सा भी हो जाते हैं. हांलाकि वे जनपक्षधर हैं और वैकल्पिक मीडिया के बहुत बड़े हिमायती भी, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके विचार कपिल सिब्बल और काटजू के करीब होते हैं. एक बार मुझसे कहने लगे, ‘तुम उस्तरा पकड़ू बंदर हो. कुंए के मेंढक  हो. दुअन्नी छाप ब्लॉग पर अपनी भड़ास निकालते हो. ऐसे बनोगे बड़े पत्रकार?’

जब मैं तब भी नहीं माना तो उन्होंने  मुझे मेरी औकात बता दी. कहने लगे, तुम ‘हिंदी के कुंठित, अयोग्य, अपनी उचक्की करतूतों के कारण बेरोजगार किंतु ब्लॉग  के जरिए काम मिलने तक येन-केन प्रकारेण चर्चा में बने रहने को उत्सुक, नाना प्रकार की चालाक निंदा-स्तुति करते हुए इर्ष्यावश हमला करने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य हो. जिस दिन कुछ पा जाओगे ‘तो तत्काल ब्लॉगबाजी छोड़ कर अफसरों, संपादकों या मालिकों के सामने फुल-टाइम दुम हिलाने’ लगोगे. तुम्हारी जगह तुम्हारे जैसे नए ‘स्ट्रगलर्स’ ले लेंगे.’

बस फिर क्या था? उनकी बात मुझे लग गई. मैंने सोच लिया कि इंटरनेट पर बैठते ही सबसे पहले दुअन्नी छाप वेबसाइटें नहीं, बस बीबीसी ही देखूंगा. मुझे नहीं रहना नाबदान, पीकदान या थूकदान में . मैं बीबीसी पढ़कर बनूंगा महान. वैसे रखा क्या है इन दुअन्नी छाप वेबसाइटों में लिंगाराम कोड़ोपी और सोनी सोरी के सिवा?

जैसे ही मैंने बीबीसी का ‘पहला पन्ना’ खोला मेरी तो दुनिया ही बदल गई. मैं सीधा ब्रिटेन की एक दुकान के सामने पहुंच गया जहां मिल रही थी, ‘रानी की चड्डी’ (शुक्रवार, 11 मई). दुकान के इधर-उधर झांकने पर पता चला कि  ‘एक डॉक्टर को महंगा पड़ा मरीज के स्तनों को ‘ज्यादा घूरना’ (शनिवार, 12 मई). और यह भी पता चला कि अमरीका में ‘स्तनपान वाली तस्वीर पर विवाद’ (शुक्रवार, 11 मई) हो गया है.

बीबीसी पढ़ने पर मेरे अंदर एक और परिवर्तन आया है. मैं अब स्तनों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया हूं. हर रोज बीबीसी में स्तन संबंधी एक खबर जरूर होती है और वह हमेशा सबसे अधिक पढ़ी गई खबर होती है. आज मुझे पता है कि ’स्तन में सिलिकॉन लगाया जाना सुरक्षित है’ और फ्रांस ने अपनी 30 हजार महिलाओं को ‘ब्रेस्ट इमप्लांट’ हटाने को कहा है. इस संबंध में जो सबसे बड़ी खोज बीबीसी के खोजी पत्रकारों ने की है वह यह है कि औरतें ’सीने में बम’ लेकर चलती हैं. मेरा सुझाव है कि भारत सरकार को बस, ट्रेन और संवेदनशील स्थानों के साथ साथ औरतों के ब्लाउजों पर भी लिख देना चाहिए, ‘औरतों के पास बैठनें से पहले उनके ब्लाउज में झांक लें वहां बम हो सकता है.’

यह बीबीसी की जानकारी का नतीजा है कि आज मैं यह जानता हूं कि ब्राजील की महिलांए बहुत हिम्मत वाली होती है और वे बिकनी पहन कर पुल पर कैटवाक कर सकती हैं. और यह भी कि जर्मनी के लोग सरकार की नीतियों पर विचार विमर्श कर (जैसाकि हम लोग अपने ब्लॉगों में करते रहते हैं) अपना समय खराब नहीं करते बल्कि वे लोग नग्नता जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत करते हैं. मुझे यह भी पता है कि पेरू में लोगों ने सड़क सुरक्षा के लिए नग्न होकर साइकिल की सवारी की. इससे पहले मेरे लिए पेरू का मतलब शायनिंग पाथ (वहां का माओवादी आंदोलन) और कामरेड गंजेलो था.

तो दोस्त, कैसी लगी दुनिया की खबरों की मेरी जानकारी? अब तो मैं नाबदान नहीं हूं. अब तो तुम मुझे उस्तरा पकड़ू बंदर नहीं कहोगे? तुम्हें पूरी तरह यकीन आ जाए इसलिए आज की सबसे बड़ी खबर तुम्हें सुनाए देता हूं. आज बीबीसी ने बताया है कि ‘दिल के दौरे के बाद सेक्स खतरनाक नहीं होता’. तो मजे करो .

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: