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सीमा आजाद और विश्वविजय की रिहाई की मांग

Posted by chimeki on June 27, 2012



पीपुल्स युनियन फॉर  सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के बैनर तले मानवाधिकार नेता सीमा आजाद और विश्वविजय की रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली के गांधि शांति प्रतिष्ठान में सम्मलेन और मशाल जुलुस का आयोजन किया गया. यह आयोजन कल 26 जून को आपतकाल विरोध दिवस के मौके पर हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता पीयूसीएल के उत्तर प्रदेश राज्य समिति के अध्यक्ष चितरंजन सिंह और संचालन जनसंस्कृति मंच की भाषा सिंह ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर थे.

देशद्रोह के आरोप में इलाहाबाद की जेल में बंद सीमा आजाद-विश्विजय मामले की कोर्ट में पैरवी कर रहे वकील रवि किरण ने निचली अदालत के फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि ,‘फैसले में बहुत से महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई है. पुलिस द्वारा पेश  आरोप पत्र (एफआईआर) से यह साफ हो जाता है कि सीमा आजाद-विश्वविजय को गृह मंत्रालय के निर्देश पर गिरफ्तार किया गया है.’ उन्होनें आगे बताया कि, ‘सीमा आजाद और विश्वविजय के मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई 17 जुलाई को होगी.’

कार्यक्रम के अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने कहा कि उनका संगठन सीमा आजाद और विश्वविजय की रिहाई के लिए समर्पित है. उन्होनें बताया कि सीमा आजाद पीयूसीएल की राज्य समिती की सचिव हैं और उन्हें हाल में संपन्न सम्मेलन में दोबारा सर्वसम्मति से राज्य सचिव चुन लिया गया है.

पूर्व न्यायाधीश और मानवाधिकारकर्मी  राजेंद्र सच्चर ने कहा कि इस मामले पर पीयूसीएल उत्तर प्रदेश सरकार से बातचीत करेगा और सरकार को इस बात से अवगत कराएगा कि सीमा आजाद और विश्वविजय राजनीतिक साजिश का शिकार हैं और सरकार को उन पर लगे अरोपों को वापस लेना चाहिए. उन्होंने  कहा कि, ‘समाजवादी पार्टी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार कहा था कि वे मायावती सरकार की ज्यादतियों  के शिकार लोगों पर लगे अरोपों को वापस लेगी. अब वक्त आ गया है कि लोहिया के अनुयायी लोहिया के विचार कि ‘कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए’ को सिद्ध कर लोहिया की बात को सही साबित करें.’ उन्होनें स्पष्ट किया कि सीमा को पीयूसीएल में इसलिए शामिल किया गया था क्योंकि वह लगातार सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर कर रही थीं . उन्होनें एक्सप्रेस वे के निर्माण से उजड़े लोगों की तकलीफों  को दुनिया के सामने स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण काम किया था.’

कार्यक्रम में तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने कहा कि, ‘सरकार अपनी जनविरोधी नितियों से खुद माओवादी पैदा कर रही है. जनता के पक्ष में बात करने वालों को झूठे आरोपों में फंसा कर और माओवादी बता कर जेलों में डाला जा रहा है.’ उन्होनें कहा कि, ‘भारत का निजाम औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त है और वह हाशिए के लोगों को जन्मजात तौर पर अपराधी मानता है और उसकी अजीविका से जुड़ी प्रत्येक मांग को राष्ट्र के खिलाफ कृत के रूप में परिभाषित करता है.’

प्रसिद्ध गांधिवादी नेता और आदिवासी अधिकार लिए संघर्षरत हिमांशु कुमार ने कहा कि, ‘आज आपातकाल विरोधी दिवस है. आपातकाल इस देश पर आई विपत्ती का नाम होना चाहिए. इस देश का 70 फिसदी किसान खेती करता है और वह तंगहाल है, आत्महत्याएं कर रहा है. यह उसका आपातकाल नहीं है. इस देश का मजदूर महनत करता है, मजदूरी करता है उसके लिए आपातकाल नहीं है. आपातकाल का अर्थ है इस देश कि सरकार पर आई आपत्ति. और सरकार क्या है? इस देश के बहुसंख्यक मजदूर-किसान को पेट भरने के लिए सरकार की जरूरत नहीं है. वह सरकार नहीं है. सरकार की जरूरत टाटा को है. टाटा के पास पैसा कहां से आता है? लौहा बेच कर. लौहा गरीब आदमी की जमीन के नीचे है और टाटा को गरीब आदमी को उसकी जमीन से हटाने के लिए सरकार की जरूरत है. यदि सरकार नहीं है तो टाटा जमीन नहीं ले सकता. इसलिए यह सरकार टाटा की सरकार है जो उसके लिए जमीन छीन रही है. अगर आप टाटा और लौहे के बीच में आ रहे हैं तो आप सरकार के बीच में आ रहे है. आप देशद्रोही है. इसलिए यह जरूरी है कि सीमा आजाद, विश्वविजय और उन तमाम लोगों की लड़ाई अदालतों के बाहर भी लड़ी जानी चाहिए. जब तक इस लड़ाई में जनता को, आदिवासी-किसान-मजदूरों को शामिल नहीं किया जाता तब तक जनता की जीत सुनिश्चित नहीं की जा सकती.

कार्यक्रम में डॉ. बिनायक सेन ने कहा कि सीमा आजाद-विश्वविजय का मामला उनके अपने मामले से मिलता जुलता है. वे आज जमानत पर रिहा है लेकिन उनको भी सजा मिल सकती है. उन्होनें आगे कहा कि, ‘वे सीमा आजाद की रिहाई के हर आंदोलन के साथ हैं.’

मानवाधिकार कार्यकर्ता महताब आलाम ने कहा कि, ‘सरकार माओवाद और मुस्लिम आतंकवाद का हौवा खड़ा कर जनता की आवाज को कुचल रही है. आज देश का हर मुस्लिम युवक डर के साए में जी रहा है. अब जबकि फर्जी मामलों में गिरफ्तार लोगों को अदालतें बरी कर रही है तो सरकार उनकी जेलों में हत्या करवा रही है. अभी हाल में मुस्लिम लोगों पर फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तार करने के खिलाफ हम लोगों ने गृहमंत्री के घर के सामने प्रदर्शन किया था जिसके बाद पुलिस ने लोगों के घर जा कर उन्हे डराया-धमकाया. उन्होनें कहा कि सामाजिक कार्य करने का उनका अनुभव यह है कि उन्हें अब हर आहट पर लगता है कि उन्हें गिरफ्तार करने पुलिस आई है.

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि, ‘वर्तमान सरकार न्यायपालिका पर दवाब डाल रही है और उन्हें यह कहते हुए को भय नहीं है कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका भी अब स्वतंत्र तरीके से काम नहीं करती.’

सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में संपन्न कार्यक्रम में जाने माने कवि नीलाभ, पीयूडीआर के परमजीत, क्रांतिकारी जनवादी मोर्चो की चंद्रकला, दिशा छात्र संगठन की शिवानी, एनएमएस की कंचन, वरिष्ठ लेखक अजय सिंह एवं इंकलाबी छात्र मोर्चा/अभियान के प्रतिनिधि ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम के अंत में मशाल जला कर प्रदर्शन किया गया.

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