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गुडगांव की गौरव इंटरनेशनल में तोड़फोड़ : रिपोर्ट

Posted by chimeki on March 3, 2015

अस्पताल में भर्ती समीचन्द के साथ पत्नी सान्जा

अस्पताल में भर्ती समीचन्द के साथ पत्नी सान्जा

14 फरवरी 2015 के दिन गुडगांव के उद्योग विहार स्थित गौरव इंटरनेशनल, रिचा ग्लोबल एवं अन्य गारमेंट कंपनियों के 5 हजार से अधिक श्रमिकों ने कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया। अपने एक साथी समीचंद पर प्रबंधन के लोगों द्वारा किए गए जानलेवा हमले के विरोध में हुए इस स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा जिससे इलाके में भगदड़ मच गई। पुलिस का दावा है कि श्रमिकों ने 100 से अधिक वाहनों से तोड़फोड़ की, जला दिया और आसपास की कंपनियों को भरी नुक्सान पहुंचाया। वहीं फैक्ट्री के मजदूरों का कहना है कि प्रबंधन के लोगों ने अपने कृत्य को छिपाने के लिए खुद के गुंडों से तोड़फोड़ कराई है ताकि श्रमिकों को फंसा कर समीचंद पर हुए कातिलाना हमले को छिपाया जा सके।

बहुत ही कम अखबारों की सुर्खी बने इस मामले ने गुडगांव प्रशासन को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। स्थानीय पुलिस से लेकर सीआईडी, सभी हिंसा के कारण तलाशने में जुट गए हैं। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक पुलिस ने समीचंद के साथ हुई मारपीट में शामिल 7 लोगों को हिरासत में ले था और मुख्य आरोपी कंपनी का पर्सनल मैनेजर आर. एस. यादव ने अग्रिम जमानत ले ली है।

समीचंद पर हमला और उसके बाद

10 फरवरी की सुबह जब सारा देश दिल्ली चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहा था और रुझान आने लगे थे ठीक उसी वक्त गौरव इंटरनेशल कंपनी में काम करने वाला समीचंद अपनी शिफ्ट के लिए घर से निकला था। पिछले दो दिन से उसे बुखार था इसलिए वह धीरे धीरे चला रहा था। उसकी पत्नी सान्जा जो उसी कंपनी में काम करती है उसके साथ ही निकली थी लेकिन बिमार समीचंद पीछे छूट गया था।  कंपनी पहुंचने पर गेट पर तैनात गार्ड ने समीचंद को भीतर आने से रोक दिया। वह कोई 5 मिनट लेट था। समीचंद का कहना है कि वह पहली बार देर से पहुंचा था इसलिए उसने अपने फिनिंशिग मैनेजर राठौड से बात करने की कोशिश की। जब गार्ड ने उसे ऐसा नहीं करने दिया तो उसने मांग की कि या तो वह उसका लेट लगा दे या मैनेजर को बुला कर उसका हिसाब करवा दे। उसके ऐसा कहते ही गार्ड उसके साथ गालीगलौज करने लगा।

समीचंद और गार्ड की तकरार देख कर गार्ड सुपरवाईजर धर्मवीर और गार्ड संतोष भी गेट पर पहुंच गए और समीचंद को घर वापस चले जाने की धमकी देने लगे। कंपनी का पर्सनल मैनेजर आर.एस. यादव जो अपने कैबिन से यह सब देख-सुन रहा था बाहर आ गया और चिल्लाते हुए गार्ड से कहने लगा, ’इसे अंदर ले चलो अभी इसका हिसाब कर देते हैं’। गार्ड रूम के अंदर आर.एस. यादव, धर्मवीर, अनिल, संतोष और ड्रायवर प्रह्लाद ने समीचंद की तब तक पिटाई की जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया। वह चीखता रहा कि उसके चार बच्चे हैं और उसे जाने दिया जाए पर पीटनों वालों पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ। इस दौरान सान्जा को किसी ने बताया कि उसके पति को गार्ड रूम लोग मार रहे है तो वह भी वहां पहुंच गई और दरबाजा खटखटाने लगी। जब समीचंद बेहोश हो गया तो आर.एस. यादव और अन्य समीचंद और उसकी बीवी उनके घर कापसहेड़ा छोड़ आए। सान्जा बताती है कि वह रो रो कर उन लोगों से अस्पताल ले जाने की मांग करती रही लेकिन वे लोग नहीं माने।

गौरव इंटरनेशनल और रिचा ग्लोबल गुड़गांव की रिचा ग्रुप की कंपनिया है जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी गारमेन्ट (कपड़ा) कंपनी है। यहां हजारों मजदूर काम करते हैं और अमरीका, युरोप, आॅस्ट्रेलिया एवं कनाडा की सभी बड़े ब्रांड रिचा ग्रुप से से माल खरीदते हैं। यह कंपनी उप्पल परिवार द्वारा संचालित है।

समीचंद पर इस हमले के बाद जो खेल शुरू हुआ उसकी मिसाल सिर्फ गुड़गांव में ही देखने को मिल सकती है। कानून, पैसा और मीडिया समीचंद की जान की कीमत में अपना अपना हिस्सा तलाशने लगे।

समीचंद का भाई शेखर बेहोश समीचंद को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गया। जहां कुछ देर बाद कुछ समय के लिए समीचंद को होश आ गया। डाक्टर की रिपोर्ट में पसली के टूटने और आंतरिक स्त्राव बताए जाने के बावजूद उसे दर्द की दवा देकर रात 11 बजे अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। रात भर समीचंद दर्द से तड़पता रहा। सुबह 5 बजे शेखर समीचंद को फिर सफदरजंग ले गया और उसे भर्ती करवाया।

शेखर बताता है कि 11 फरवरी के दिन समीचंद को देखने आर.एस. यादव, मोहन, धर्मवीर और प्रह्लाद अस्पताल आए थे और रू. 15000 ले कर समझौता करने की धमकी दी थी। वह बताता है कि आर.एस. यादव का सहायक मोहन उसे बार बार धमकी देता रहा कि समझौता कर लो वर्ना गुड़गांव में काम करना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन शेखर ने भाई की जान पर समझौता करने से इंकार कर दिया।

12 फरवरी की सुबह शेखर तड़पते हुए समीचंद को आॅटो में लेकर गुड़गांव के उद्योग विहार थाने गया। शेखर का कहना है कि वहां मौजूद एक पुलिस वाले ने फोन कर कंपनी के कुछ लोगों को बुला लिया और यह कहता हुआ बाहर चला गया कि ‘आपस में निपट लो’। शेखर वहां से निकल कर निकल आया और समीचंद को गुड़गांव के ईएसआईएस अस्पताल में भर्ती कर दिया। पुलिस ने शेखर को यह नहीं बताया कि उसने उसकी शिकायत का क्या किया।

इस बीच 12 फरवरी के ही दिन गौरव इंटरनेशनल और आसपास की कंपनियों के मजदूरों को जब दो दिन तक समीचंद की कोई खबर नहीं मिली तो वे भड़क गए। कंपनी गेट के सामने प्रबंधन के खिलाफ मजदूरों ने धर्ना दिया और आर.एस. यादव के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनकी मांग थी कि प्रबंधन समीचंद की स्थिति की सही जानकारी मजदूरों को दे।

कंपनी के प्रबंधन ने मजदूरों की जायज मांग नहीं मानी बल्कि उल्टा पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने आते ही बिना किसी चेतावनी के मजदूरों को पीटना शुरू कर दिया। अचानक हुई पुलिस कर्रवाही से मजदूर सकते में आए गए और चारो तरफ अफरातफरी मच गई। पुलिस ने बेरहमी से स्त्री-पुरुष मजदूरों को पीटा। कई मजदूर घायल हुए और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ति करवाया गया। अस्पताल में भर्ति एक मजदूर ने बताया कि पुलिस ने क्षेत्र को चारो तरफ से बंद कर दिया था जिससे मजदूरों निकल नहीं पाए।

बताया जा रहा है कि 12 फरवरी के दिन समीचंद की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कंपनी के दो गार्डो को गिरफ्तार किया था लेकिन रिचा ग्रुप के प्रसर्नल मैनेजर डागर ने उन्हे शाम को ही छुड़ा लिया।

दूसरे दिन अखबारों ने इस घटना को पुलिस और प्रबंधन के पक्ष से ऐसे प्रकाशित किया मानों कंपनी और आसपास हुई तोड़फोड़ के लिए समीचंद और उसकी बीवी ही जिम्मेदार हैं। यहां तक कि जब लोगों को लग रहा था कि समीचंद की मौत हो गई है तो किसी भी अखबार ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि सच्चाई क्या हैं। जो खबर पुलिस उन्हे दे रही थी वहीं समाचार अखबारों में प्रकाशित हो रहा था।
जब 14 फरवरी को गुड़गांव के मजदूर एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर दवाब बनाया तो पुलिस ने एफआईआर लिखे जाने की सूचना दी और कार्यवाही का आश्वासन दिया है। पुलिस ने आर.एस. यादव, धर्मवीर और अनिल के खिलाफ दफा 323, 342 और 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है जो अपराध को देखते हुए बहुत मामूली धाराएं हैं। अब खबर यह आ रही है कि पुलिस इन्हीं कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर रही है।

ज्ञात हो कि गौरव इंटरनेशलन में मारपीट का यह पहला मामला नहीं है। इस पहले भी मजदूरों के साथ मारपीट, महिला कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार की खबरें प्रकाश में आती रहीं हैं।

समकालीन तीसरी दुनिया के मार्च 2015 अंक में प्रकाशित

वि.श.

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