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मिस्टर शाही के नोट

Posted by chimeki on November 12, 2016

मिस्टर शाही के बारे में उनके कर्मचारी बताते हैं कि ‘चोर है स्याला’। बात ये है कि काम तो वे खूब लेते हैं लेकिन जब India Currency Overhaulवेतन देने की बात हो तो उनका सिद्धांत है कि ‘काम तो ढेले का नहीं आता लेकिन तनख़्वाह सभी को टाइम पर चाहिए’।

उनके दफ्तर में महीना 10 तारीख का होता है। याने वे इस तारीख से कर्मचारियों के वेतन के बारे में सोचते हैं। और उनके सोचने की एकाग्रता इनती तीव्र होती है कि सोचते सोचते कब 20 या 22 तारीख आ जाती है पता ही नहीं चलता। फिर एक दिन अकाउण्टेंट जोशी बताता है कि आज वेतन लेते जाना। ‘वह दिन जोशी का दिन होता है’, राधेश्याम बताते हैं। उस दिन वह ऐसे पेश आता है जैसे मालिक शाही नहीं वह खुद है।

‘मोहन टेबुल पर झाडू मारा?’

‘जी।’

‘इधर आ। ये देख। स्याले कामचोर हैं सब के सब। साहब पेमैंट काटते नहीं इसलिए सर पर चढ़ गए हैं सब के सब।’

‘जी मारा था।’

‘तो मैने हग दिया क्या यहां?’

इस तरह वे उस दिन को खूब इंजॉई करते हैं। दूसरे दिन से वे अपनी टेबुल पर होते हैं और फिर अगले महीने इसी किसी दिन जागते हैं।

लेकिन इस बार ‘उनका दिन’ पूरे 20 दिन पहले ही आ गया। प्रधान मंत्री ने ऐलान किया कि 500 और 1000 का नोट नहीं चलेगा और मिस्टर शाही की तपस्या एक ही क्षण में भंग हो गई। उन्होने जोशी को फोन लगाया और एलान कर दिया कि कल सब की तनख्वा दे दो। उनहोने यह भी कह दिया कि जिन्हे एडवांस चाहिए उनको भी दे दो।

जोशी जी को अपने साहब पर ऐसे ही गर्व थोड़े ही है। वे जानते हैं कि साहब जो घर की गुप्त अलमारी में पैसा रखते हैं वे ऐसे ही बुरे वक्त के लिए होता है। देखा कैसे बुरे वक्त में साहब ने अपना पैसा अपने कर्मचारियों के लिए से बाहर कर दिया।

9 तारीख को उस कार्यलय में वेतन बांट दिया गया। आज 12 तारीख है और राधेश्याम सोच रहे हैं कि कब वे अपनी तनख्वा को इस्तेमाल कर पाएंगे।

***

नोट- 500 और 1000 के नोट को प्रचलन से हटाने के केन्द्र सरकार के फैसले के बाद आम जन जीवन में जो असर देखने को मिल रहा है उसी को दर्ज करने की एक कोशिश है यह स्तंब। इस श्रंख्ला में यह कोशिश रहेगी कि उस आम जनता पर इस फरमान का असर दर्ज किया जाए जिस के हित में इस फैसले के होने का दावा किया गया है। सड़क पर चलते हुए या बैंक में लंबी कतार पर खड़ा यह आदमी खुद को कैसे देख रहा है यह सुनाने की एक कोशिश है यह स्तंब। आगे जिन पात्रों का जिक्र है वे असली हैं लेकिन कहीं कहीं आवश्यकता अनुसार इनके नामों पर थोड़ा सा हेर फेर किया गया है।

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